रायपुर। छत्तीसगढ़ के शहरों को आधुनिक, सुव्यवस्थित और सुविधासंपन्न बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने शहरी विकास पर जोर दिया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने नगरीय निकायों से भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर विकास परियोजनाएं तैयार करने का आह्वान किया है। उनका कहना है कि शहरों का विकास केवल मौजूदा समस्याओं तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि आने वाले दशकों की जरूरतों के मुताबिक ठोस मंसूबे के साथ योजनाएं बनाई जानी चाहिए।
नवा रायपुर स्थित मेफेयर लेक रिजॉर्ट में बुधवार को अर्बन चैलेंज फंड (UCF) और अर्बन इन्वेस्ट विंडो (UiWIN) पर आयोजित प्रथम क्षेत्रीय कार्यशाला का मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने शुभारंभ किया। कार्यक्रम में नगरीय विकास, वित्तीय संसाधन, तकनीकी विशेषज्ञता और शहरों की बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने पर जोर दिया गया।
₹1 लाख करोड़ के फंड से शहरी विकास को मिल सकता है बढ़ावा
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में शहरी विकास को नई दिशा मिली है। अर्बन चैलेंज फंड शहरों को आधुनिक बनाने, निवेश आकर्षित करने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का अवसर प्रदान करता है।उप मुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव ने बताया कि भारत सरकार ने अर्बन चैलेंज फंड के लिए एक लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया है।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के नगरीय निकायों के सामने अब ऐसी गुणवत्तापूर्ण और आर्थिक रूप से व्यवहार्य परियोजनाएं तैयार करने की चुनौती है, जिनके माध्यम से उपलब्ध संसाधनों का बेहतर लाभ लिया जा सके।यह राशि देश में शहरी विकास को बढ़ावा देने के लिए निर्धारित फंड का हिस्सा है। छत्तीसगढ़ को इससे कितनी राशि मिलेगी, यह संबंधित परियोजनाओं और लागू प्रावधानों पर निर्भर करेगा।
हुडको और सेप्ट यूनिवर्सिटी के साथ दो अहम समझौते
कार्यशाला के दौरान नगरीय विकास को मजबूती देने के लिए दो महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। पहला समझौता हुडको और छत्तीसगढ़ शासन के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के बीच हुआ, जबकि दूसरा समझौता नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग और सेप्ट यूनिवर्सिटी के बीच संपन्न हुआ।
इन समझौतों के जरिए नगरीय निकायों को परियोजनाओं की योजना बनाने, वित्तीय संसाधन जुटाने, तकनीकी विशेषज्ञता प्राप्त करने, प्रशिक्षण और संस्थागत क्षमता बढ़ाने में सहयोग मिलेगा। इससे शहरों की वास्तविक जरूरतों के मुताबिक परियोजनाओं को तैयार करने और उन्हें प्रभावी ढंग से लागू करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
जलभराव और अव्यवस्थित तारों की समस्या पर भी जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि शहरों में बरसात के दौरान होने वाले जलभराव का स्थायी समाधान तलाशना जरूरी है। इसके लिए बेहतर जल निकासी व्यवस्था और दीर्घकालिक योजना तैयार की जानी चाहिए।उन्होंने बिजली और अन्य सेवाओं के अव्यवस्थित तारों की समस्या का उल्लेख करते हुए कहा कि जहां संभव हो, वहां तारों को भूमिगत करने की योजनाएं बनाई जाएं। इससे नागरिक सुरक्षा और शहरी व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सड़क, पेयजल, बिजली, स्वच्छता और जल निकासी से जुड़ी योजनाओं को अलग-अलग देखने के बजाय समग्र शहरी नियोजन का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल से ही शहरों की समस्याओं का मुकम्मल समाधान संभव है।
विकसित छत्तीसगढ़ के लक्ष्य में शहरों की अहम भूमिका
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण के लक्ष्य को हासिल करने में शहरों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। छत्तीसगढ़ सरकार ने भी विकसित छत्तीसगढ़ का विजन डॉक्यूमेंट तैयार किया है और उसके अनुरूप काम किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि शहर ऐसे होने चाहिए, जहां उद्योग और व्यापार को बढ़ावा मिले, निवेश के नए अवसर बनें, युवाओं को रोजगार मिले और नागरिकों को बेहतर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हों। इसके लिए नगरीय निकायों को आज की जरूरतों के साथ भविष्य की चुनौतियों को भी ध्यान में रखना होगा।
परियोजनाओं की लागत के साथ रखरखाव पर भी ध्यान दें निकाय
उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि केवल किसी परियोजना का निर्माण करा देना पर्याप्त नहीं है। उसकी उपयोगिता, संचालन, रखरखाव और वित्तीय व्यवहार्यता पर भी शुरुआत से ध्यान देना होगा। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से अपने शहरों के विकास के लिए ऐसी योजनाएं तैयार करने का आह्वान किया, जिनका लाभ आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचे।
केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू ने भी शहरी निकायों को वित्तीय रूप से मजबूत बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि परियोजनाओं को नागरिकों के लिए उपयोगी बनाने के साथ आर्थिक रूप से व्यवहार्य रखना जरूरी है। इसके लिए बैंक वित्तपोषण, बाजार आधारित संसाधनों और सार्वजनिक-निजी भागीदारी जैसे विकल्पों का प्रभावी इस्तेमाल किया जा सकता है।
कार्यशाला में जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद
कार्यशाला में प्रदेश के सभी 14 नगर निगमों के महापौर, नगर पालिकाओं के अध्यक्ष, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा, हुडको के सीएमडी संजय कुलश्रेष्ठ, सेप्ट यूनिवर्सिटी के प्रेसिडेंट बरजोर मेहता सहित जनप्रतिनिधि, विशेषज्ञ और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
कार्यशाला में अर्बन चैलेंज फंड और अर्बन इन्वेस्ट विंडो के विभिन्न पहलुओं, वित्तीय प्रबंधन, आधुनिक शहरी नियोजन और परियोजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेषज्ञों ने मार्गदर्शन दिया। सरकार की मंशा है कि बेहतर योजना, तकनीकी सहयोग और वित्तीय संसाधनों के समुचित उपयोग से छत्तीसगढ़ के शहरों को अधिक स्वच्छ, सुरक्षित, सुविधासंपन्न और आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जाए।
