गठिया को मामूली दर्द समझना पड़ सकता है भारी, विशेषज्ञों ने दी समय पर इलाज की नसीहत

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रायपुर। जोड़ों में लगातार दर्द, सूजन और सुबह उठने पर अकड़न को मामूली परेशानी समझकर नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। विशेषज्ञ चिकित्सकों ने आगाह किया है कि गठिया के शुरुआती लक्षणों की समय पर पहचान और मुनासिब उपचार से जोड़ों को होने वाले स्थायी नुकसान का जोखिम कम किया जा सकता है।विश्व गठिया दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ चैप्टर ऑफ इंडियन रूमेटोलॉजी एसोसिएशन (CGIRA) की ओर से रायपुर प्रेस क्लब में जन-जागरूकता प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई।इस दौरान विशेषज्ञों ने गठिया और अन्य संधि रोगों के लक्षण, इलाज और बीमारी को लेकर फैली भ्रांतियों पर विस्तार से जानकारी दी।

बुजुर्गों तक सीमित नहीं है गठिया की बीमारी

चिकित्सकों ने बताया कि गठिया केवल बुजुर्गों को होने वाली बीमारी नहीं है। इसके अलग-अलग प्रकार बच्चों, युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों को भी अपनी चपेट में ले सकते हैं। जोड़ों में लगातार दर्द, सूजन, सुबह के समय अधिक अकड़न और चलने-फिरने में परेशानी इसके प्रमुख लक्षण हो सकते हैं।विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की कि इन संकेतों को सामान्य दर्द मानकर टालने के बजाय समय रहते चिकित्सकीय परामर्श लें। शुरुआती दौर में बीमारी की पहचान होने से उपचार को बेहतर तरीके से आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

रूमेटॉइड आर्थराइटिस में जोड़ों को नुकसान का खतरा

प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया गया कि रूमेटॉइड आर्थराइटिस एक ऐसी बीमारी है, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से अपने ही जोड़ों पर हमला करने लगती है। समय पर पहचान और उचित उपचार नहीं मिलने पर जोड़ों को स्थायी नुकसान पहुंच सकता है।चिकित्सकों के मुताबिक, बीमारी के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करना मरीजों के लिए परेशानी बढ़ा सकता है। लिहाजा, लगातार दर्द और सूजन जैसी शिकायतों पर संजीदगी बरतना जरूरी है।

बिना सलाह दर्द निवारक दवाओं और स्टेरॉयड से बचें

विशेषज्ञों ने सलाह दी कि जोड़ों में लगातार दर्द, सूजन या सुबह के समय ज्यादा अकड़न महसूस होने पर चिकित्सकीय जांच कराएं। बिना डॉक्टर की सलाह के लंबे समय तक दर्द निवारक दवाओं और स्टेरॉयड का सेवन करने से बचें।इसके साथ ही संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि और चिकित्सकीय सलाह के मुताबिक व्यायाम को दिनचर्या में शामिल करने पर जोर दिया गया। विशेषज्ञों ने कहा कि गठिया के कई प्रकारों के प्रभावी उपचार उपलब्ध हैं। सही समय पर इलाज मिलने से बीमारी को नियंत्रित करने और मरीज की जीवन गुणवत्ता में सुधार लाने में मदद मिल सकती है।

जन-जागरूकता को बताया अहम कदम

कार्यक्रम में CGIRA के अध्यक्ष डॉ. जगबीर सिंह कमेट, सचिव डॉ. जॉयदीप सामंता सहित एसोसिएशन के अन्य सदस्य मौजूद रहे। चिकित्सकों ने कहा कि गठिया को लेकर जागरूकता बढ़ाना, समय पर पहचान सुनिश्चित करना और सही उपचार के प्रति लोगों को प्रेरित करना बेहद अहम है।विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की कि बीमारी के लक्षणों को हल्के में न लें और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेकर उचित उपचार कराएं।

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