जशपुर/बगीचा। छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के बगीचा जनपद पंचायत में विकास कार्यों के भुगतान को लेकर विवाद सामने आया है। जिला पंचायत सदस्य आशिका कुजूर ने अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर कथित कमीशनखोरी और फाइलें लंबित रखने के आरोप लगाए हैं। उन्होंने लंबित भुगतानों का शीघ्र निराकरण करने और पूरे जनपद में निर्माण कार्यों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
कमीशन नहीं देने पर फाइलें रोकने का आरोप
आशिका कुजूर के मुताबिक, 15वें वित्त आयोग और विकास निधि से कराए गए उनके कार्यों की भुगतान संबंधी फाइलें पिछले कई महीनों से लंबित हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कथित कमीशन देने से इनकार करने के कारण कार्यों के मूल्यांकन, सत्यापन और भुगतान की प्रक्रिया में जानबूझकर देरी की जा रही है।हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना बाकी है।
सभी निर्माण कार्यों की जांच
की मांगजिला पंचायत सदस्य ने कहा कि जनप्रतिनिधियों को मिलने वाली विकास निधि जनता की अमानत है। इस राशि का इस्तेमाल जनहित और विकास कार्यों के लिए होना चाहिए। उन्होंने मांग की कि जांच केवल उनके कार्यों तक सीमित न रहे, बल्कि जनपद पंचायत बगीचा में कराए गए सभी निर्माण कार्यों की निष्पक्ष पड़ताल की जाए।
उन्होंने प्रत्येक कार्य की स्वीकृत राशि, निर्माण की गुणवत्ता, मौके पर हुए वास्तविक कार्य और भुगतान से संबंधित विवरण सार्वजनिक करने की मांग भी उठाई। साथ ही, लंबित भुगतान का जल्द निराकरण करने और जांच में आरोप प्रमाणित होने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की।
‘अब संवाद नहीं, आंदोलन होगा’
आशिका कुजूर ने अपने रुख को स्पष्ट करते हुए कहा, “अब संवाद नहीं, आंदोलन होगा! जनता के पैसे का हिसाब मांगना मेरा अधिकार है। भ्रष्टाचार के दबाव में न झुकूंगी, न जनता के अधिकारों की लड़ाई से पीछे हटूंगी।”उन्होंने प्रशासन से मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने, लंबित फाइलों का निराकरण कराने और पूरे जनपद में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की अपील की है।
प्रशासन की भूमिका पर नजर
अब इस मामले में प्रशासन की कार्रवाई और संबंधित अधिकारियों का पक्ष महत्वपूर्ण होगा। यदि जांच कराई जाती है, तो उससे भुगतान में देरी के कारणों और लगाए गए आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल, मामले में आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने का इंतजार है।
