नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की कवरेज के दौरान महिला पत्रकारों समेत मीडियाकर्मियों के साथ कथित बदसलूकी और पुलिस कार्रवाई का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस मामले को लेकर इंडियन जर्नलिस्ट्स यूनियन (IJU) ने कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए घटना की निंदा की है और आरोपी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
आईजेयू के अध्यक्ष बलविंदर सिंह जम्मू और महासचिव डी. सोम सुंदर ने 5 अक्टूबर को जारी संयुक्त बयान में कहा कि प्रदर्शन की रिपोर्टिंग कर रहे पत्रकारों के साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार, डराने-धमकाने और शारीरिक आक्रामकता की घटनाएं सामने आई हैं। यूनियन के मुताबिक, इनमें विशेष रूप से महिला पत्रकारों के साथ किए गए कथित व्यवहार को लेकर गंभीर आपत्ति है।
एसीपी स्तर के अधिकारी पर गंभीर आरोप
आईजेयू ने एक महिला पत्रकार की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत का हवाला देते हुए कहा कि ड्यूटी के दौरान एसीपी रैंक के एक अधिकारी पर कथित तौर पर महिला पत्रकार से छेड़छाड़ और अभद्र व्यवहार करने का आरोप लगाया गया है।
यूनियन ने इस शिकायत को गंभीर बताते हुए मामले की निष्पक्ष जांच और दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।आईजेयू का आरोप है कि महिला पत्रकार द्वारा शिकायत किए जाने के बावजूद पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने में कई घंटों तक एफआईआर दर्ज नहीं की गई। यूनियन ने इस देरी पर सवाल उठाते हुए कहा कि शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई होना जरूरी है और किसी भी मामले में पुलिस की भूमिका निष्पक्ष तथा कानून के अनुरूप होनी चाहिए।
प्रेस पहचान पत्र दिखाने के बावजूद कार्रवाई का आरोप
यूनियन के मुताबिक, मुख्यधारा के मीडिया संस्थानों और स्वतंत्र डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े कई महिला पत्रकारों एवं अन्य मीडियाकर्मियों को प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर धक्का-मुक्की, डराने-धमकाने और हिरासत जैसी कार्रवाई का सामना करना पड़ा। IJU का कहना है कि संबंधित पत्रकारों ने अपने वैध प्रेस पहचान पत्र भी प्रदर्शित किए थे।यूनियन ने कहा कि पत्रकारों को सार्वजनिक प्रदर्शनों की रिपोर्टिंग के दौरान अपना पेशेवर दायित्व निभाने का अधिकार है।
ऐसे में किसी भी तरह की ज्यादती, उत्पीड़न या गैरकानूनी हिरासत की शिकायतों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
इंटरनेट बंद किए जाने पर भी सवाल
आईजेयू ने जंतर-मंतर के आसपास मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को कथित तौर पर बंद किए जाने पर भी आपत्ति जताई। यूनियन का कहना है कि मौके पर इंटरनेट सेवा बाधित होने से पत्रकारों की स्पॉट रिपोर्टिंग प्रभावित होती है और आम लोगों तक घटनास्थल की तत्काल जानकारी पहुंचाने में परेशानी होती है।IJU ने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में प्रशासन को पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करनी चाहिए, ताकि पत्रकार बिना किसी भय या दबाव के अपना काम कर सकें।
IJU ने रखीं ये प्रमुख मांगें
:आरोपी पुलिस अधिकारी और संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ तत्काल आपराधिक एवं विभागीय कार्रवाई की जाए।
:पत्रकारों के साथ कथित मारपीट, उत्पीड़न और हिरासत की समयबद्ध एवं स्वतंत्र जांच कराई जाए।
: केंद्रीय गृह मंत्रालय और दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करें।
:सार्वजनिक प्रदर्शनों की कवरेज के दौरान पत्रकारों के साथ दुर्व्यवहार या उनके पेशेवर काम में अनावश्यक बाधा न डाली जाए।
आईजेयू ने कहा कि पत्रकारों के साथ होने वाली ऐसी घटनाओं पर खामोशी नहीं बरती जा सकती और प्रेस की स्वतंत्रता तथा पत्रकारों की सुरक्षा से जुड़े मामलों में जवाबदेही तय होना जरूरी है।
छत्तीसगढ़ में भी विरोधइधर, छत्तीसगढ़ में आईजेयू से संबद्ध स्टेट वर्किंग जर्नलिस्ट्स यूनियन छत्तीसगढ़ ने भी जंतर-मंतर की घटना को लेकर विरोध जताया है। संगठन ने पत्रकारों के साथ कथित दुर्व्यवहार की निंदा करते हुए कहा कि देश की राजधानी में पत्रकारों के साथ इस तरह की घटनाएं प्रेस की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़े गंभीर सवाल खड़े करती हैं।संगठन ने संबंधित मामले में निष्पक्ष जांच और दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।

